"नोटबंदी का मकसद था 15-20 सबसे अमीर क्रोनी कैपटलिस्ट, सबसे भ्रष्ट लोगों की मदद करना कि वे अपना कालाधन सफेद कर सकें. नोटबंदी का मकसद था कि छोटे दुकानदार और छोटे व्यापार को खत्म करके बड़ी कंपनियों को मदद करना. छोटे दुकानदार, छोटे बिजनेस और कारोबार जो चलाते हैं, अच्छी तरह सुनो. नोटबंदी कोई गलती नहीं थी. नोटबंदी आपके उपर आक्रमण था. नोटबंदी आपके पैर पर कुल्हाड़ी मारी गई थी. गलतफहमी में मत आइए. ये गलती नहीं थी. ये जानबूझकर आपको नष्ट करने के लिए और सबसे बड़े अमेजन जैसे बिजनेस के लिए रास्ता खोलने का तरीका है. प्रधानमंत्री ने यह जानबूझ कर किया है." यह शब्द हैं राहुल गांधी के.
आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी काफी स्पष्ट थे. आज उनकी जबान नहीं लड़खड़ाई. स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सबसे बड़ा घोटाला है. लेकिन यह समझ में नहीं आया कि जिस क्रोनी कैपटलिज्म को वे कोस रहे हैं, उसके जनक तो मनमोहन सिंह हैं. उन्होंने पाला पोसा और अब मोदी जी उसे दुह रहे हैं. क्या राहुल गांधी के पास क्रोनी कैपटलिज्म को समाप्त करने का कोई रोडमैप है? उनके पास कौन सा जनपक्षधर आर्थिक मॉडल है?
एक पत्रकार के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा, माफी तब मांगी जाती है, जब गलती होती है. प्रधानमंत्री जी ने गलती नहीं की, यह जानबूझ कर किया. प्रधानमंत्री जी का लक्ष्य था कि जिन्होंने प्रधानमंत्री जी को मार्केटिंग के पैसे दिलवाए, जिनके कारण टेलीविजन पर रोज नरेंद्र मोदी का चेहरा दिखाई देता है, उनको पैसा मिले. उनको पैसा कैसे मिले? हिंदुस्तान के किसान, महिला, छोटे दुकानदार, छोटे और मझोले बिजनेस के जेब में से पैसा निकालकर उनके 15-20 मित्रों को मिले. सिस्टम है. क्रोनी कैपिटलिस्ट नरेंद्र मोदी जी की मार्केटिंग करते हैं, नरेंद्र मोदी जी जनता से पैसा छीनकर क्रोनी कैपिटलिस्ट को देते हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी जी और जेटली जी ने हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया है. हमारे समय ढाई लाख करोड़ रुपया नॉन परफार्मिंग एसेट था. आज 12 लाख करोड़ रुपया नॉन परफार्मिंग एसेट है. क्यों? क्योंकि नरेंद्र मोदी जी ने अपने मित्रों की रक्षा की है. उनका वन प्वाइंट प्रोग्राम है कि हिंदुस्तान के क्रोनी कैपिटलिज्म की कैसे मदद की जाए.
कालेधन को सफेद करने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात के कोआॅपरेटिव बैंक में, अमित शाह जी जिस बैंक में डायरेक्टर हैं, 700 करोड़ रुपये उस बैंक में बदला गया. इसे सिर्फ स्कैम कहा जा सकता है.
इसके अलावा, राहुल गांधी ने राफेल डील के मामले में अरुण जेटली के सवालों का जवाब दिया. अनिल अंबानी की कंपनी की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कई सवाल किए. राहुल का कहना है कि उन्हीं क्रोनी कैपिटलिस्ट के लिए राफेल का घोटाला भी किया गया.
बहरहाल, नरेंद्र मोदी ने जो आशा जगाई थी कि नोटबंदी का दूरगामी फायदा होगा, वह आरबीआई के आंकड़ों से ध्वस्त हो गया. निकटतक फायदा जनता देख चुकी है. इसलिए सरकार को विपक्ष की इस मांग को मान लेना चाहिए कि एक ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी गठित हो और नोटबंदी और राफेल घोटाले की जांच हो.
आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी काफी स्पष्ट थे. आज उनकी जबान नहीं लड़खड़ाई. स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सबसे बड़ा घोटाला है. लेकिन यह समझ में नहीं आया कि जिस क्रोनी कैपटलिज्म को वे कोस रहे हैं, उसके जनक तो मनमोहन सिंह हैं. उन्होंने पाला पोसा और अब मोदी जी उसे दुह रहे हैं. क्या राहुल गांधी के पास क्रोनी कैपटलिज्म को समाप्त करने का कोई रोडमैप है? उनके पास कौन सा जनपक्षधर आर्थिक मॉडल है?
एक पत्रकार के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा, माफी तब मांगी जाती है, जब गलती होती है. प्रधानमंत्री जी ने गलती नहीं की, यह जानबूझ कर किया. प्रधानमंत्री जी का लक्ष्य था कि जिन्होंने प्रधानमंत्री जी को मार्केटिंग के पैसे दिलवाए, जिनके कारण टेलीविजन पर रोज नरेंद्र मोदी का चेहरा दिखाई देता है, उनको पैसा मिले. उनको पैसा कैसे मिले? हिंदुस्तान के किसान, महिला, छोटे दुकानदार, छोटे और मझोले बिजनेस के जेब में से पैसा निकालकर उनके 15-20 मित्रों को मिले. सिस्टम है. क्रोनी कैपिटलिस्ट नरेंद्र मोदी जी की मार्केटिंग करते हैं, नरेंद्र मोदी जी जनता से पैसा छीनकर क्रोनी कैपिटलिस्ट को देते हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी जी और जेटली जी ने हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया है. हमारे समय ढाई लाख करोड़ रुपया नॉन परफार्मिंग एसेट था. आज 12 लाख करोड़ रुपया नॉन परफार्मिंग एसेट है. क्यों? क्योंकि नरेंद्र मोदी जी ने अपने मित्रों की रक्षा की है. उनका वन प्वाइंट प्रोग्राम है कि हिंदुस्तान के क्रोनी कैपिटलिज्म की कैसे मदद की जाए.
कालेधन को सफेद करने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात के कोआॅपरेटिव बैंक में, अमित शाह जी जिस बैंक में डायरेक्टर हैं, 700 करोड़ रुपये उस बैंक में बदला गया. इसे सिर्फ स्कैम कहा जा सकता है.
इसके अलावा, राहुल गांधी ने राफेल डील के मामले में अरुण जेटली के सवालों का जवाब दिया. अनिल अंबानी की कंपनी की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कई सवाल किए. राहुल का कहना है कि उन्हीं क्रोनी कैपिटलिस्ट के लिए राफेल का घोटाला भी किया गया.
बहरहाल, नरेंद्र मोदी ने जो आशा जगाई थी कि नोटबंदी का दूरगामी फायदा होगा, वह आरबीआई के आंकड़ों से ध्वस्त हो गया. निकटतक फायदा जनता देख चुकी है. इसलिए सरकार को विपक्ष की इस मांग को मान लेना चाहिए कि एक ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी गठित हो और नोटबंदी और राफेल घोटाले की जांच हो.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें