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| फोटो साभार: भोपाल समाचार |
मैं मेट्रो में यात्रा करते समय अपने दोस्त से कह रहा था कि देखो आज पेट्रोल का दाम फिर बढ़ गया. इतने में बगल खड़े एक सज्जन ने कहा, चार साल पहले महंगाई नहीं थी? तब नहीं खाते थे? देश के लिए थोड़ा महंगा नहीं खरीद सकते हो? मैंने पूछा, भैया चार साल में देश पर ऐसा कौन सा संकट आ गया कि हर नागरिक को हर सुविधा पर अतिरिक्त पैसा भुगतान करना चाहिए?
उन्होंने कहा, यह सब तुमको समझ में नहीं आएगा. जब तक सरकार के पास पैसा नहीं होगा तब तक देश का निर्माण कैसे होगा? आप लोग जरा सा पढ़ लिख क्या गए, किसी की बात नहीं सुनते.
मैं सनाका खा गया. मुझे लगा शायद देश किसी बड़े संकट में हैं और मुझे पता नहीं चला है. मैंने घर आकर टीवी खोला, भारत माता की जय नामक चैनल लगाया. शाम के नौ बज रहे थे. एंकर चमकचंद महोदय जनसंख्या समस्या पर बहस करवाने जा रहे थे.
एंकर महोदय ने पैनलिस्ट पोंगापंथी अखंड नारायण से पूछा, जी हम आपसे शुरुआत करते हैं, बताइए कि भारत को बढ़ती जनसंख्या से निपटने के लिए क्या करना चाहिए?
पैनलिस्ट ने सवाल पूरा होने पहले ही पोंगापंथी जी ने जवाब देने के उतावलेपन के साथ अपनी तर्जनी उंगली दिखाना शुरू कर दिया था. जैसे ही एंकर चुप हुए, पोंगापंथी जी जोर से चीखे, यह सवाल इस देश के वामपंथियों से पूछिए, इस देश के बुद्धिजीवियों से पूछिए, कुछ कांग्रेसी पत्रकारों से पूछिए, तथाकथित सेकुलरों से पूछिए कि वे मुसलमानों की बढ़ती आबादी का समर्थन क्यों कर रहे हैं?
एंकर ने टोका, लेकिन पोंगापंथी जी, आबादी तो पूरे देश की बढ़ रही है, समग्रता में देखा जाए तो हिंदू जनसंख्या ही ज्यादा बढ़ रही है. यह तो पूरे देश के लिए एक समाधान सोचना होगा, आपने भी तो कोई पहल नहीं की. इसमें अलग से मुसलमानों की बात कहां से आ गई?
पोंगापंथी जी उत्तेजना में बोले, देखिए आपने फिर से हिंदुओं और देश के विरोध में टिप्पणी कर दी है. आपने मुसलमानों का बचाव किया और हिंदुओं को आहत करने वाली टिप्पणी कर दी है. क्या आप हम हिंदुओं को इसीलिए बुलाती हैं अपने चैनल पर ताकि आप हमारी और हमारे हिंदू भाइयों की बेइज्जती कर सकें?
एंकर महोदय घबरा गए, लेकिन किसी तरह थूक निगलते हुए थोड़ा थमें, फिर दोगुने जोर से चीखे- सत्तारूढ़ पार्टी की तरफ से आरोप है कि विपक्ष लगातार हिंदुओं की भावना आहत कर रहा है. भावना जी इतनी बार आहत हुई हैं कि कई बार तो हत होते होते बची हैं. यह बहुत गलत हो रहा है इस देश में. विपक्ष को जवाब देना होगा... आप हमारे चैनल के फलां नंबर पर एसएमएस करके बताएं कि क्या विपक्ष द्वारा लगातार हिंदुओं की भावना जी को आहत करना जायज है? यस आॅर नो... जल्दी से हमें भेज दें.
इसके बाद ब्रेक हो गया. फिर चैनल पर स्वदेशी कंपनी पतितअंजली प्राइवेट लिमिटेड के दिव्य उत्पाद स्वदेशी वियाग्रा का प्रचार आया कि आप देशहित में स्वदेशी अपनाकर कैसे अपनी खोई हुई शक्ति वापस पा सकते हैं और देश के क्रांतिकारियों का कर्ज अदा कर सकते हैं. इसके बाद बहस फिर शुरू हुई....
एंकर महोदय, स्क्रीन पर हाजिर हुए और जोर से चीखे- विपक्षी दलों में हमारे पास एक ही पैनलिस्ट है, बाकी सब सत्ता पक्ष के हैं. तो हम कभी यूनाइट न होने वाले संपूर्ण विपक्ष की ओर से उन्ही से सवाल कर लेते हैं, ढपोरशंख जी, आप बताएं कि आप लोग, यानी सभी विपक्षी दल सिर्फ हिंदुओं की भावनाएं क्यों आहत कर रहे हैं?
ढपोरशंख जी कुछ बोलते, इसके पहले ही पोंगापंथी अखंड नारायण जी को गुस्सा आ गया. वे कान को फाड़ देने की क्षमता वाली अपनी आवाज की तीव्रता बढ़ाते हुए बोले, इनको जवाब देना होगा कि हिंदुओं के देश में ऐसा कैसे चलेगा? हम आज आपके चैनल के माध्यम से पूरे देश से कह देना चाहते हैं कि मंदिर वहीं बनेगा और हम ही बनाएंगे. यह देश के एक अरब हिंदुओं की आस्था का मामला है...
ढपोरशंख जी का चेहरा छोटा सा स्क्रीन पर ऐसा दिख रहा था जैसे वे कुछ बोलने की कोशिश में दांत चियार रहे हों. इधर पोंगापंथी जी का भव्य चेहरा स्क्रीन पर तारी था. वे बोले जा रहे थे, अरे मुल्ले, अरे पाकिस्तानी, अरे जिहादी, अरे पिड्डी, ओ पिड्डी, बिस्कुट खाओ, पिड्डी बिस्कुट खाओ....
नेपथ्य से ढपोरशंख की आवाज घिघियाती हुई मध्यम सी सुनाई पड़ी, वे एंकर से कह रहे थे कि चमकचंद जी, आपने जनसंख्या समस्या पर डिबेट आयोजित की है, यह हो क्या रहा है आपके चैनल पर?
चमकचंद जी ने स्क्रीन के किनारे जलती हुई आग में से झांक कर तेज आवाज में प्रहार किया, विपक्ष का रवैया बेहद गैरजिम्मेदाराना है. सरकार का विरोध सिर्फ विरोध करने के लिए नहीं करना चाहिए. और तब तक फिर से स्वदेशी पतितअंजली प्राइवेट लिमिटेड का प्रचार आ गया. हमने चैनल बंद किया, सिर में थोड़ा सा झंडू बाम लगाकर मालिश किया और किचन में जाकर घुइया छीलने लगा.
घुइया छीलते हुए हमें चमकचंद जी का चेहरा याद आया और मैंने मन में सोचा, आज चमकचंद जी ने क्या बेहतरीन मुद्दा उठाया. ऐसा 70 साल में पहली बार हो रहा है.

1 टिप्पणी:
बहुत अच्छा लिखा है। एक एक शब्द सार्थक है।
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