एक काली रात का अँधेरा
दौड़ता है मेरी रगों में
अक्सर, जब हम जन रहे होते हैं
साथ साथ, एक चाँद
एक बहुत सुन्दर घड़ी में
होता हूँ मैं तुम्हारे साथ
और इस श्याम-श्वेत, धूसर रंग से डरी हुई
भयातुर आँखों वाली तुम
दुबकी होती हो मेरे सीने में
मैं एक बाजू में थामे तुम्हें
दुसरे से लड़ रहा होता हूँ, तमाम स्याहियों से
बिना तुम्हें खबर किये
इस दुर्दांत संघर्ष के बावजूद
तुम्हारी आँखों के उजाले में
बहुत सुन्दर होती है
सृजन की हर रात
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