अमित सिंह
सिल्क कहती हैं कि किसी भी फिल्म को चलाने के लिए उसमें सबसे जरूरी तीन चीजें होती हैं एंटरटेनमेंट, एंटरटेनमेंट और एंटरटेनमेंट। फिल्म डर्टी पिक्चर में यही चीज है। यह फिल्म साउथ की फिल्मों में अपने हुस्न का जला दिखाकर स्टार बनी सिल्क स्मिता की कहानी कहती है। हालांकि अपने हुस्न का जला दिखाकर स्टार बननेोलों में सिल्क अकेला नाम नहीें थीं और भी अभिनेतियां मसलन नायलोन नलिनी और पालिस्टर पदमिनी आदि ने भी इस दौर में अपनी कामुक अदाओं और अंग प्रदर्शन के जरिये दर्शकों को दीाना बना दिया था। यह फिल्म उस दौर के सिनेमा पर बात करती है और इसी बहाने या कहें सिल्क के बहाने पुरूष प्रधान समाज पर गहरा व्यंग करती है। पुरुष प्रधान समाज महिला की बोल्डनेस से भयभीत हो जाता है। पुरुष बोल्ड हो तो इसे अगुण नहीं माना जाता है, लेकिन यह बात महिला पर लागू नहीं होती। पर यहां तो किस्सा ही दूसरा है। सुपरस्टार सिल्क और बोल्डनेस एक-दूसरे के पर्यायाची हैं। और हां उनकी यही बात उनकी बिखरी जिंद्गी एं रहस्मय अंत की कारण भी बन जाती है। फिल्मों में सफलता पाने के लिए सिल्क अच्छा-बुरा नहीं सोचती है। ह मादकता का ऐसा तूफान हैं, जहां जाती है बंडर आ जाता है। ह इतनी बोल्ड थी कि जो प्रेमी उससे शादी करनेोला है उससे उसके बाप की उम्र पूछती है। उसके अंदर ऐसी बहुत सी बातें थी जिसे समाज स्ीकार्य तो करता है पर सिर्फ रात में। दिन के उजाले में इसे अश्लील माना जाता है।
कहानी- द डर्टी पिक्चर 80 के दशक की महिला रेशमा(द्यिा बालन) की कहानी है जो अपने अभिनेत्री बनने के सपने के साथ म्रास आ जाती हैं। शुरुआत में उसे कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है मगर जल्द ही बड़े परदे पर बिकने का ज्ञिान उनके समझ में आ जाता है। ह सिल्क बन छा जाती है। मगर उनकी निजी जिंद्गी चौपट होने लगती है। रील पर कामयाब हीरोइन रीयल लाइफ में बुरी तरह से नाकामयाब हो जाती है। ह सिर्फ सच्चा प्यार पाना चाहती हैं, लेकिन उनकी छ िके चलते लोग उन्हें बिस्तर पर तो ले जाना चाहते हैं, लेकिन घर नहीं। इस बीच उनके जीन में सुपर स्टार सूर्या (नसीरुद्दीन शाह) और उनका छोटा भाई रमा- स्क्रिप्ट राइटर (तुषार कपूर ) आता है, मगर सच्चा प्यार न मिलने से सिल्क एकदम टूट जाती है और उसका करियर भी ढलान पर आने लगता है। अंत में निर्देशक (इब्राहीम) इमरान हाशमी के रूप में उन्हें सच्चा प्यार जरुर मिलता है मगर तब तक देर हो जाती है और सिल्क सबको अलदिा कह जाती है।
धिा बालन ने सिल्क के बिदांस रैये और दर्द एं प्यार की तड़प का जानदार अभिनय किया है। पूरी फिल्म में ह छायी हुई है। तीनो पुरूष किरदार धिा के सामने फीके पड गए हैं। नसीर और इमरान ने अपने रोल के साथ पूरा न्याय किया है और तुषार के पास करने के लिए कुछ खास है नहीं। फिल्म का निर्देशन जोरदार है, लेकिन सबसे बढिया काम फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर रजत अरोड़ा का है। उन्होंने ऐसी बढिया स्क्रिप्ट और जानदार डायलग लिखे हैं जो दर्शकों को अंत तक फिल्म से बांधे रखते हैं। खासकर बेस्ट सपरेटिंग एक्टर का आर्ड जीतने पर सिल्क द्वारा बोला गया डॉयलाग। अपने बोल्ड डायलग और सेक्सी सीन्स के चलते फिल्म को ए सर्टीफिकेट दिया गया है और यही बात उन दर्शकों की कसौटी पर बिल्कुल फिट नहीं बैठेगी जो साफ सुथरी और फैमिली फिल्मों के शौकीन हैं। बाकी फिल्म धमाकेदार है

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