आज रात तुम छत पर रहना
बदल ओढ़ के आऊंगा मैं
सारी रात तेरे दामन में
खूब झमाझम बरसूँगा
एक चाँद का सुर्ख बताशा
लाऊंगा जो तुम्हे पसंद हैं
और तारों का लडीदार
इक उजला गजरा लाऊंगा
रात को लोरी गाते गाते
सर पे तेरे सजाऊंगा
नींद में जब तू बह जाएगी
मैं सपना बन जाऊंगा
खारी खारी शीरीं शीरीं
रात ज़बां पर तुम रख लेना
भर ले आऊंगा अंजुरी में
आसमान सारा पी लेना
अगर लाज लागे तुमको तो
उफक खींच कर तन ढँक लेना
और देखना साथ बरसने का होता
क्या खूब जायका!
आज रात तुम छत पर रहना
बादल ओढ़ के आऊंगा मैं.....
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